Cooking Oil Price Drop :खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला तेल हमारे रसोई घर की रीढ़ की हड्डी है, यह वह सामग्री है जिसके बिना हमारे दिन की शुरुआत होना भी मुश्किल लगता है, चाहे वह सुबह का नाश्ता हो या शाम का स्वादिष्ट भोजन, और अब एक अच्छी खबर है जो सीधे आपके मासिक बजट को प्रभावित करने वाली है, वर्ष 2025 में खाने के तेल की कीमतों में एक सुखद गिरावट देखने को मिल रही है, सरकार द्वारा आयात शुल्क में कमी और वैश्विक बाजार में हुए बदलावों ने मिलकर यह सकारात्मक माहौल बनाया है, आइए विस्तार से समझते हैं इस पूरी स्थिति को।
खाने के तेल की कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण
तेल की कीमतों में यह गिरावट अचानक या संयोग से नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कुछ ठोस और सकारात्मक कारण काम कर रहे हैं,
सरकार ने कच्चे खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है, यह कदम मार्च 2025 तक के लिए लागू रहेगा, जिससे आयात करना सस्ता हो गया है और इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को मिल रहा है,
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में पहले से ही गिरावट का रुख था, जनवरी से मार्च के बीच सरसों के तेल में यह ट्रेंड साफ देखा जा सकता था,
आयात कम होने के कारण भी घरेलू बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन बना हुआ है, अप्रैल 2025 में खाद्य तेल के आयात में 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी,
भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संगठन के अनुसार, देश में आत्मनिर्भरता बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम हो रही है, जो कीमतों को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो रहा है,
अक्टूबर 2025 में विभिन्न तेलों के ताज़ा रिटेल भाव
आइए अब एक नजर डालते हैं अक्टूबर 2025 के महीने में हमारे रसोई घर में इस्तेमाल होने वाले मुख्य तेलों के वर्तमान रिटेल भाव पर,
सूरजमुखी का तेल, इसकी कीमत लगभग 1359 रुपये प्रति 10 किलोग्राम है, जो प्रति लीटर के हिसाब से करीब 136 रुपये बैठता है, पिछले महीने की तुलना में यह मामूली 0.12 प्रतिशत ऊपर है, लेकिन साल की शुरुआत के मुकाबले यह कम है,
सोयाबीन तेल, इसका भाव 1220 से 1225 रुपये प्रति 10 किलोग्राम के बीच चल रहा है, यानी प्रति लीटर लगभग 122 से 123 रुपये, वर्ष 2025 में सबसे ज्यादा आयात होने वाला यह तेल अभी भी काफी स्थिर है,
पाम ऑयल, वैश्विक बाजार में इसके दाम 443.8 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हैं, जबकि भारत में इसकी खुदरा कीमत लगभग 110 से 120 रुपये प्रति लीटर है, और यह 0.18 प्रतिशत की गिरावट के ट्रेंड में है,
सरसों का तेल, इस वर्ष सरसों के तेल में भी गिरावट देखी गई है, जिसकी वर्तमान कीमत 170 से 176 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जनवरी में इसके दाम इससे कहीं अधिक थे,
कीमतों में यह गिरावट हमारे लिए क्यों है महत्वपूर्ण
खाने के तेल की कीमतों में आई यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि इसका सीधा और सकारात्मक असर हर उस परिवार की जेब पर पड़ेगा जो रोजमर्रा की इस जरूरत पर पैसा खर्च करता है,
त्योहारों के सीजन में तेल की खपत काफी बढ़ जाती है, ऐसे में कीमतों का स्थिर या कम होना उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत का काम करता है,
अगस्त 2025 में तेल की खपत लगभग 99,05,2810 टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है, लेकिन गिरावट के कारण इस भारी खपत का भी बजट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ा,
अर्जेंटीना जैसे देशों से बढ़ी हुई आपूर्ति ने वैश्विक स्तर पर वनस्पति तेल की कीमतों को कम करने में मदद की है,
भारत वर्ष 2025-26 में लगभग 17.1 मिलियन टन रिफाइंड तेल का आयात कर सकता है, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ने से कीमतों पर नियंत्रण बना रहने की उम्मीद है,
निष्कर्ष,
कहने का भाव यह है कि वर्ष 2025 में खाने के तेल की कीमतों में आई गिरावट एक स्वागत योग्य बदलाव है, यह परिवर्तन सरकार की सक्रिय नीतियों और वैश्विक बाजार के अनुकूल हालात का नतीजा है, उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले त्योहारों के मौसम में भी यह राहत बनी रहेगी, और आम उपभोक्ताओं को एक स्थिर और किफायती दर पर इस जरूरी चीज की उपलब्धता मिलती रहेगी।
अस्वीकरण, यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है और विभिन्न समाचार स्रोतों से एकत्रित आंकड़ों का संकलन है, तेलों के वास्तविक रिटेल भाव आपके क्षेत्र और ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों या विश्वसनीय समाचार पोर्टलों से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।