कड़ाके की ठंड में पशुओं की सेहत कैसे बचाएं? जानिए पशुपालन विभाग की जरूरी सलाह

Floating WhatsApp Button

सर्दियों का मौसम इंसानों के साथ-साथ पशुओं के लिए भी बेहद चुनौती भरा होता है। जैसे-जैसे तापमान गिरता है, वैसे-वैसे पशुओं के बीमार पड़ने और दूध उत्पादन कम होने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार थोड़ी-सी लापरवाही पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा देती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए पशुपालन विभाग ने किसानों और पशुपालकों के लिए खास एडवाइजरी जारी की है। यूपी के मऊ जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार गिरि ने ठंड के मौसम में पशुओं की देखभाल को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। अगर आप इन बातों का पालन करते हैं, तो न सिर्फ आपके पशु सुरक्षित रहेंगे बल्कि सर्दियों में भी दूध उत्पादन बेहतर बना रहेगा।


खुले आसमान के नीचे पशुओं को न बांधें

कड़ाके की ठंड और शीतलहर में पशुओं को खुले स्थान पर बांधना उनके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
पशुओं को हमेशा घिरी हुई जगह, छप्पर या शेड में रखें ताकि ठंडी हवा सीधे शरीर पर न लगे। बाड़े में मौजूद रोशनदान, दरवाजे और खिड़कियों को जरूरत के अनुसार टाट या बोरे से ढक दें।
हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि बाड़े में हवा का सही आवागमन बना रहे, ताकि घुटन और नमी न हो।


पशु बाड़े की साफ-सफाई बेहद जरूरी

सर्दियों में गंदगी और नमी से बीमारियां तेजी से फैलती हैं। इसलिए पशु बाड़े की नियमित साफ-सफाई बेहद जरूरी है।
गोबर और मूत्र की निकासी सही ढंग से होनी चाहिए और कहीं भी पानी जमा न होने दें। बिछावन के लिए भूसा, लकड़ी का बुरादा या गन्ने की खोई का इस्तेमाल करें।
सूखा और साफ बाड़ा पशुओं को ठंड और संक्रमण दोनों से बचाता है।


ठंड से बचाने के लिए झूल पहनाएं

पशुओं को ठंड से बचाने के लिए जूट के बोरे से बना झूल पहनाना काफी फायदेमंद होता है। झूल इस तरह पहनाएं कि वह ढीला न हो और खिसके नहीं।
जरूरत पड़ने पर पशु बाड़े के बाहर सुरक्षित दूरी पर अलाव भी जलाया जा सकता है, लेकिन पशुओं और उनके बच्चों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। अगर अलाव बाड़े के पास जलाया जाए तो गैस निकलने के लिए रोशनदान खुला रखना जरूरी है।


सर्दियों में खानपान पर दें विशेष ध्यान

ठंड के मौसम में पशुओं को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। संतुलित और पौष्टिक आहार देने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन भी बना रहता है।
आहार में खली, दाना और चोकर की मात्रा बढ़ाएं। पशुओं को हमेशा साफ और ताजा पानी पिलाएं, और ज्यादा ठंड में गुनगुना पानी देना ज्यादा लाभकारी होता है।
दूध निकालने के बाद पशुओं को कुछ समय धूप में खड़ा करें ताकि शरीर को गर्माहट मिले। नवजात बच्चों को खीस (कोलस्ट्रम) जरूर पिलाएं, इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। प्रसव के बाद मां पशु को ठंडा पानी न दें, बल्कि गुनगुना पानी ही पिलाएं।


समय पर टीकाकरण कराना न भूलें

सर्दियों में भेड़ और बकरियों में पीपीआर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराना बहुत जरूरी है।
गर्भित पशुओं का विशेष ध्यान रखें और प्रसव के समय जच्चा-बच्चा दोनों को ठंडी हवा से बचाने की पूरी व्यवस्था करें। अगर किसी पशु में कपकपी, बुखार या कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।


आपदा में पशु मृत्यु पर कहां करें संपर्क

अगर किसी आपदा के कारण पशु की मृत्यु हो जाती है, तो राहत राशि के लिए राजस्व विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
पशुओं से जुड़ी किसी भी समस्या या जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1962 पर संपर्क करने की सलाह भी दी गई है।


सही देखभाल से सर्दी में भी रहेगा फायदा

थोड़ी-सी सतर्कता और सही देखभाल अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को कड़ाके की ठंड से सुरक्षित रख सकते हैं। इससे न केवल बीमारियों से बचाव होगा, बल्कि दूध उत्पादन में होने वाली गिरावट भी रोकी जा सकेगी।


Disclaimer

यह लेख सामान्य जानकारी और पशुपालन विभाग द्वारा जारी सलाह पर आधारित है। पशुओं की स्थिति और मौसम के अनुसार देखभाल के तरीके अलग हो सकते हैं। किसी भी बीमारी या आपात स्थिति में नजदीकी पशु चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।