Ancestral Property Distribution News 2025: भारत में परिवारों के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद आम बात बन गई है। अक्सर भाई बहन या परिवार के सदस्य अपने हिस्से को लेकर एक-दूसरे के खिलाफ कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने पैतृक संपत्ति के बंटवारे और अधिकारों को लेकर कुछ नए नियम बनाए हैं ताकि हर व्यक्ति को उसके अधिकार का हिस्सा कानूनी रूप से मिल सके और विवाद की स्थिति से बचा जा सके।
पैतृक संपत्ति क्या होती है
पैतृक संपत्ति वह होती है जो परिवार में चार पीढ़ियों तक बिना किसी विभाजन के चलती आ रही हो। यह संपत्ति दादा से पिता और फिर पुत्र तक स्वतः अधिकार के रूप में हस्तांतरित होती है। इस प्रकार की संपत्ति पर केवल एक व्यक्ति का अधिकार नहीं होता बल्कि पूरे परिवार के सभी सदस्यों का समान अधिकार होता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संपत्ति का प्रकार | पैतृक संपत्ति |
| पीढ़ियों की संख्या | चार पीढ़ी तक |
| अधिकार प्राप्त सदस्य | दादा, पिता, पुत्र, पुत्री |
| कानूनी आधार | हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 |
पैतृक संपत्ति का बंटवारा कैसे करें
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सबसे पहले परिवार के सभी सदस्यों के बीच सहमति आवश्यक होती है।
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यदि सहमति नहीं बनती है तो किसी योग्य वकील की मदद से कोर्ट में वसीयत या बंटवारा याचिका दाखिल की जा सकती है।
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तहसील या उप निबंधन कार्यालय में जाकर आवेदन पत्र भरना होता है।
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आवेदन के साथ आधार कार्ड, संपत्ति के दस्तावेज, खतौनी, खसरा नंबर और परिवार के सदस्यों की पहचान पत्र संलग्न करना जरूरी होता है।
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अधिकारी दस्तावेजों की जांच के बाद बंटवारा रिपोर्ट तैयार करते हैं और संपत्ति के हिस्से को रजिस्ट्री रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है।
कानूनी अधिकार और हिस्सेदारी का निर्धारण
हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 के अनुसार पुत्र और पुत्री दोनों को समान अधिकार दिया गया है। पहले केवल पुरुषों को पैतृक संपत्ति में अधिकार प्राप्त था लेकिन संशोधन के बाद बेटियों को भी बराबर का अधिकार मिला है।
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पुत्र और पुत्री दोनों समान हिस्से के अधिकारी होते हैं।
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यदि पिता की मृत्यु हो जाती है तो उनके बच्चों को समान भाग में हिस्सा मिलता है।
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यदि परिवार में बेटियों का विवाह हो गया है तब भी वे अपने हिस्से की मांग कर सकती हैं।
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कोर्ट के आदेश के अनुसार सभी सदस्यों को समान अधिकार के तहत संपत्ति में हिस्सा दिया जाएगा।
अपने हिस्से की पुष्टि और नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया
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व्यक्ति को अपने गांव या नगर निगम के भूमि रिकॉर्ड कार्यालय में जाना होता है।
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वहां संपत्ति का खसरा नंबर या खतौनी नंबर निकालना होता है।
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अधिकारी के पास जाकर संपत्ति से संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी प्राप्त करनी होती है।
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यदि रिकॉर्ड सही पाया जाता है तो व्यक्ति तहसील कार्यालय या उप निबंधन कार्यालय में जाकर अपने नाम दर्ज करवाने के लिए आवेदन कर सकता है।
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आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और परिवार की सहमति पत्र संलग्न करना जरूरी होता है।
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अधिकारी सभी कागजातों की जांच कर संपत्ति को कानूनी रूप से आपके नाम पर दर्ज कर देते हैं।
सरकार द्वारा शुरू की गई सहायता योजनाएं
सरकार ने नागरिकों की सुविधा के लिए भूमि से संबंधित कई योजनाएं शुरू की हैं जिनसे अब संपत्ति की जानकारी घर बैठे देखी जा सकती है।
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डिजिटल भूमि अभिलेख योजना के तहत भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन किया गया है।
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डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के माध्यम से संपत्ति का डेटा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया गया है।
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पटवारी और तहसील स्तर पर शिकायत निवारण केंद्र की स्थापना की गई है।
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जहां किसी संपत्ति पर विवाद होता है वहां अधिकारी तुरंत समाधान प्रदान करते हैं।
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नागरिक अब राज्य के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर जाकर अपनी संपत्ति का रिकॉर्ड और नामांकन स्थिति देख सकते हैं।
विवादों से बचने के लिए सुझाव
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परिवार के बीच आपसी बातचीत से सहमति बनाएं।
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सभी दस्तावेजों को सही और अपडेट रखें।
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किसी भी निर्णय से पहले कानूनी सलाह अवश्य लें।
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कोर्ट में जाने की आवश्यकता तभी हो जब विवाद सुलझ न सके।
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अपने हिस्से को रजिस्ट्री में दर्ज करवाकर भविष्य के विवादों से बचें।
निष्कर्ष
सरकार के नए नियमों के बाद अब पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाना पहले से कहीं आसान हो गया है। इससे परिवारों में झगड़े कम होंगे और हर व्यक्ति को उसका उचित अधिकार मिल सकेगा। यदि आप भी अपने हिस्से की संपत्ति दर्ज करवाना चाहते हैं तो सरकारी प्रक्रिया का पालन करें और सही दस्तावेजों के साथ आवेदन करें।